लोक जीवन : दत्तात्रेय बालकृष्ण कालेलकर द्वारा मुफ्त हिंदी पीडीएफ पुस्तक | Lok Jeevan : Duttatreya Balkrishna Kalelkar Free Hindi PDF Book

पुस्तक का विवरण : प्रबोधिनी एकादशी के दिन देव निद्रा छोड़कर उठते हैं| गरीबों का देव भी अब जाग्रत हुआ है और हजारों बरस के बाद जनता भी गाँवों के प्रति अपना क्या धर्म है इसे सोचने लगी है| स्वराज्य की उपासना और स्वातंत्र्य का ध्यान करते-करते देश सेवकों को यह साक्षात्कार हुआ कि भारत की सच्ची शक्ति गाँवों में रहने वाले हिन्दुस्तान के करोड़ो गरीबों और उनकी लाखों बरस की मजी हुई संस्कृति के अंदर है…………..

Description about eBook : On the day of Prabodhini Ekadashi, God wakes up sleep. The God of the poor is now awake and after thousands of years, the public has started thinking about what their religion is towards villages. In doing so, meditation of the freedom and freedom of the Swarajya has been realized that the country’s servants have been interviewed that the true power of India is within the mingled culture of millions of poor and millions of years of Hindustan living in the villages……………….

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