अभिज्ञान : नरेन्द्र कोहली द्वारा मुफ्त हिंदी पीडीएफ पुस्तक | Abhigyan : by Narendra Kohli Free Hindi PDF Book

पुस्तक का विवरण : ‘‘इस बार बहुत दिनों पर चक्कर लगा बाबा !’’ सुदामा ने बाबा का झोला एक खूंटी पर टांग दिया। सुशीला ने तिनकों का बना आसन-भूमि पर बिछा दिया,‘‘बैठिए बाबा !’’ बाबा ने सुदामा को कोई उत्तर नहीं दिया। आसन पर बैठकर पहले तो सांस को नियंत्रित-सा करते रहे और फिर सुशीला की ओर उन्मुख होकर बोले, ‘‘कैसी हो बेटी ?’’ सुशीला मुस्कराई, ‘‘हम कैसे होंगे बाबा ! जैसे आप छोड़ गए थे, वैसे ही हैं। वहीं हैं। यहां कुछ भी घटित नहीं होता ! न अच्छा, न बुरा। हमारा संसार तो अचल है न । आप सुनाइए, कैसे हैं ?’’ बाबा हंस पड़े, ‘‘तेरा-मेरा सोचना विपरीत दिशा में चलता है बिटिया ! तुम सोचती होगी कि जो कुछ घटित होता है, बाहर ही होता है। घर में कुछ नहीं घटता। घरों में व्यवस्थापूर्वक रहने वालों के जीवन में कोई विशेष आरोह-अवरोह नहीं है। उनका कुशल-मंगल एकरस ही रहता है…।’’ ‘‘हाँ, बाबा !’’ ‘‘और जो मुझ जैसे घुमक्कड़ लोग हैं, बाहर-ही-बाहर रहते हैं। घटनाओं के साथ वे ही चलते हैं। उनके कुशल की सूचना मिलनी ही चाहिए। वे किसी दुर्घटना के साथ न हो जाएं या उनके साथ कहीं कोई दुर्घटना न हो जाए…।’’ बाबा हंस पड़े। ‘‘अब बाबा का शब्दों के साथ खिलवाड़ और भी बढ़ गया है।’’ सुदामा धीरे-से बोले। ‘‘शब्दों का खिलवाड़ ही सही, पर बात तो ठीक कह रहे हैं बाबा !’’ सुशीला ने सुदामा का प्रतिवाद कि……………

Description about eBook : “This time, Baba turned around for a long time!” Sudama put Baba’s bag on a peg. Sushila laid the groundworks on the ground floor, “Sit down, Baba!” Baba did not respond to Sudama. Before sitting on the asana, he continued to control the breath and then turned towards Sushila and said, “How are you?” Sushila smiled, “How will we be Baba! Just like you left, it’s like that. Are right there. Nothing happens here! neither good nor bad. Our world is immovable You heard, how are you? ” Baba laughed, “Tera mine thinking goes in the opposite direction! You have to think that whatever happens, it happens outside. Nothing decreases in the house There is no special marching in the lives of those who live in the house. His skillful mansion remains monotonous …. ” “Yes, Baba!” ” And those who are like strollers like me, stay out-and-out. They go with the events only His skillful information must be received. They should not accompany an accident or there may be no accident with them …. “Baba laughed. “Now the mess with Baba’s words has increased even further.” Sudama slowly spoke. “The words are just right, but the thing is right, Baba!” Sushila said that Sudama’s remarks……………….

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