जयद्रथ-वध : मैथिलीशरण गुप्त द्वारा मुफ्त हिंदी पुस्तक | Jaidrath Vadh : by Maithilisharan Gupt Free Hindi Book 

पुस्तक का विवरण / Description about eBook : 

चाचक | प्रथम सर्वत्र ही ‘जय जानकी-जीवन’ कहो,

फिर पूर्वजों के शील की शिक्षा-तरंगों में बहो |

दुःख शोक जब जो आ पड़े, सो धेर्यपूर्वक सब सहो,

होगी सफलता क्यों नहीं कर्तव्य-पथ पर द्रढ़ रहो |

अधिकार खोकर बैठ रहना, यह महा दुष्कर्म है ;

न्यायार्थ अपने बन्धु को भी दण्ड देना धर्म है |

इस तत्व पर ही कौरवों से पांडवों का रण हुआ,

जो भव्य भारतवर्ष के कल्पान्त का कारण हुआ ||

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